करण सिंह त्यागी को ‘केसरी चैप्टर 2’ के लिए 56वें IFFI में मिला सर्वश्रेष्ठ डेब्यू भारतीय फीचर फिल्म निर्देशक का पुरस्कार

उभरती प्रतिभाओं का सम्मान करते हुए आज 56वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (IFFI) ने फिल्म ‘केसरी चैप्टर 2’ के लिए निर्देशक करण सिंह त्यागी को सर्वश्रेष्ठ डेब्यू भारतीय फीचर फिल्म निर्देशक के प्रतिष्ठित सम्मान से नवाज़ा। समापन समारोह में यह पुरस्कार केंद्रीय सूचना व प्रसारण तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने उन्हें प्रदान किया। इस अवसर पर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव श्री संजय जाजू भी उपस्थित थे।
करण सिंह त्यागी—फिल्ममेकर, लेखक और निर्माता—अपनी सटीक कहानी कहने की शैली और सार्थक सिनेमा के प्रति प्रतिबद्धता के लिए जाने जाते हैं। ‘बंदिश बैंडिट्स’ और ‘कालकूट’ जैसी सफल परियोजनाओं के बाद ‘केसरी चैप्टर 2’ के ज़रिए उन्होंने अपने निर्देशन कौशल को एक नए स्तर पर स्थापित किया है।
निर्णायक मंडल ने टिप्पणी करते हुए कहा कि फिल्म में “सिनेमा के मूल्यों, ऐतिहासिक महत्व और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के निर्णायक क्षणों को अद्भुत संवेदना के साथ प्रस्तुत किया गया है।” जूरी तथा इंडियन पैनोरमा के चेयरपर्सन ने निर्देशक, निर्माता, कलाकारों और तकनीकी टीम को बधाई देते हुए इसे “दृश्यात्मक उत्कृष्टता” का बेहतरीन उदाहरण बताया।
‘केसरी चैप्टर 2’ की कहानी
फिल्म उस असाधारण वास्तविक घटना पर आधारित है जिसमें केरल के साहसी बैरिस्टर शंकरन नायर ने जालियांवाला बाग हत्याकांड की सच्चाई दुनिया के सामने लाने के लिए ब्रिटिश साम्राज्य को चुनौती दी थी। वायसराय की परिषद के सदस्य रहते हुए नायर को जनरल डायर के निर्दोष नागरिकों पर जानबूझकर की गई गोलाबारी के अटल प्रमाण मिलते हैं। युवा वकील दिलरीत गिल के साथ मिलकर वे ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ एक साहसिक कानूनी लड़ाई शुरू करते हैं—जिसका उद्देश्य था सैकड़ों शहीदों के लिए न्याय की मांग।
फिल्म केवल नायर के अटूट साहस को ही नहीं दिखाती, बल्कि यह भी दर्शाती है कि उनकी लड़ाई ने स्वतंत्रता संग्राम की आग को और भड़काया। दमदार कोर्टरूम ड्रामा और प्रभावशाली अभिनय के माध्यम से ‘केसरी चैप्टर 2’ भारत के इतिहास के इस कम ज्ञात अध्याय को रोचक और भावनात्मक तरीके से जीवंत करती है।
IFFI का यह पुरस्कार क्यों महत्वपूर्ण है
सर्वश्रेष्ठ डेब्यू भारतीय फीचर फिल्म निर्देशक का यह पुरस्कार उन नए फिल्मकारों को सम्मानित करता है जिनकी पहली फिल्में गहरी कलात्मक क्षमता और नवाचारी सोच दिखाती हैं। हर साल पांच तक डेब्यू फिल्मों का चयन किया जाता है और उन्हें महोत्सव में प्रदर्शित किया जाता है। इस पुरस्कार में ₹5 लाख नकद राशि और प्रमाणपत्र शामिल है।
करण सिंह त्यागी जैसे फिल्मकारों को सम्मानित कर IFFI यह पुनः स्थापित करता है कि भारतीय सिनेमा का भविष्य उन नई आवाज़ों के हाथों सुरक्षित है, जो साहसिक विचारों, नई दृष्टि और परिवर्तनकारी कथाओं के साथ देश के रचनात्मक परिदृश्य को आगे बढ़ा रहे हैं।
IFFI के बारे में
1952 में स्थापित इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया (IFFI) दक्षिण एशिया का सबसे पुराना और सबसे प्रतिष्ठित सिनेमाई उत्सव है। इसे नेशनल फिल्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NFDC), सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार और एंटरटेनमेंट सोसाइटी ऑफ गोवा (ESG), गोवा सरकार के सहयोग से आयोजित किया जाता है। वर्षों में IFFI एक वैश्विक मंच बन चुका है जहाँ पुनर्स्थापित क्लासिक्स से लेकर नये प्रयोगों तक, दिग्गजों से लेकर युवा फिल्मकारों तक सभी को समान स्थान मिलता है।
गोवा की खूबसूरत पृष्ठभूमि में 20 से 28 नवंबर तक आयोजित होने वाला इसका 56वां संस्करण भाषाओं, शैलियों, नवाचारों और रचनात्मकता का शानदार संगम प्रस्तुत करता है—एक ऐसा उत्सव जो भारतीय सिनेमा की प्रतिभा को विश्व पटल पर और उज्ज्वल करता है।
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